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यह पहला लेख है, परिचय दे दूं। मैं घिंघारु, उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र में पाया जानी वाली एक कांटेदार झाड़ी, जिस पर लाल रंग के छोटे-छोटे फल लगते हैं। मेरा स्वाद कुछ खट्टा-कुछ मीठा होता है (सेब की तरह)। जिसे आप मेरी लेखनी में भी महसूस कर पायेंगे।
दो-टूक बोलना और लिखना मेरी कमजोरी है, मेरा साधुवाद है मेरा पहाड़ डाट काम के कर्ता-धर्ताओं को, जिन्होंने उत्तराखण्ड के ब्लागरों को यह मंच प्रदान किया है।
अब मिलेंगे उत्तराखण्ड की आवाज के साथ, जो होगी, खरी-खरी….दो-टूक।

स्वागत है, आपका।